आप इन अंतिम संस्कार अभ्यासों को जानने के लिए आश्चर्यचकित होंगे

मृत्यु के बाद मृत शरीर के अंतिम संस्कार करने का रिवाज तो हर जगह है। किसी धर्म में मृत शरीर को दफना दिया जाता है तो कहीं पर जला दिया जाता है। लेकिन कुछ ऐसी पारंपरिक प्रथाएं भी है जिनके बारे में पढक़र आप हैरान हो जाएंगे।

फामाडिहाना : यह प्रथा मैडागास्कर के मलागासी लोगों की होती है। इसमें मृत शरीर को कब्र से निकालकर साफकपड़े पहनाकर उसके आस-पास डांस करते हैं। ऐसा करके वह अपने पूर्वजों को याद करते हैं और फिर गांव का एक चक्कर लगवाकर उसे फिर दफना देते हैं।

स्काई बरियल : अंतिम संस्कार की ये प्रथा आज भी चलती आ रही है, जिसका पालन तिब्बत, ङ्क्षकघई और इनर मंगोलिया के इलाकों में होता है। इसमें मरे हुए इंसान के शरीर के छोटे-छोटे टुकड़ों को काटकर पहाड़ों पर रखा जाता है। मानना है कि मरने के बाद इंसान के शरीर का कोई काम नहीं होता और उसे प्रकृति के हवाले छोड़ देना चाहिए। इन शरीरों को जंगली जानवर और चिडिय़ाएं खा जाती हैं।

लटकते हुए ताबूत : प्राचीन चाइना के राजवंश में मृत लोगों के ताबूतों को पहाड़ की चोटी पर रखा जाता था। उनका मानना था कि निर्जीव इंसान को आकाश के करीब रखने से उसे स्वर्ग नसीब होता है। पुरातत्व विभाग के लोगों को इन पहाडियों से कई ताबूत मिले हैं जो सदियों पुराने हैं।

गिद्धों को खिलाना : पारसी समुदाय की अंतिम संस्कार की प्रथा आज भी चलती आ रही है। इस प्रथा के अनुसार, मृत्यु के बाद शरीर को नहलाकर पारसियों के धाॢमक स्थान में गिद्धों के लिए छोड़ दिया जाता है। इस प्रथा का महत्व ये है कि मरने के बाद इंसान को उसके मानवीय शरीर को त्याग देना चाहिए।

गला घोंट कर मौत : हैरानी की बात यह है कि सती जैसी प्रथा, फिजी के कुछ इलाकों में आज भी चल रही है। इस प्रथा में मृत इंसान के किसी करीबी की गला घोंट कर मौत दे दी जाती है। कहा जाता है कि मृतक को दूसरी दुनिया में अकेला नहीं जाना चाहिए और उसके साथ उसके किसी करीबी को भी उसके साथ ही भेजना चाहिए जिससे मृत्यु का दुख कम हो जाए।

नरभक्षिता : पापुआ न्यू गिनी और ब्राजील के कुछ इलाकों में मरने वाले के करीबी रिश्तेदार उसके शरीर को खा लेते थे। वैसे अब यह प्रथा खत्म हो गई है। ऐसा भी कहा जाता है कि ऐसा इसलिए किया जाता था क्योंकि इन इलाकों में खाने की कमी थी, जिसके कारण इस प्रथा का जन्म हुआ।

पेड़ से बांध कर : कुछ लोग अपने मृत रिश्तेदारों के शवों को उनके गांव के किसी पेड़ से लटका देते थे। वैसे कहा जाता है कि ये प्रथा नास्तिक लोग मानते थे जो किसी धर्म के अनुसार नहीं चलते थे।

सती : हिन्दू और कुछ दूसरे धर्मों में इस सती प्रथा को माना जाता था, जिसमें पति की मृत्यु के बाद उसकी पत्नी को भी आग में कूद कर अपनी जान देनी होती थी।

 1861 में, जब भारत अंग्रेजों के आधीन था तब क्वीन विक्टोरिया ने इस प्रथा पर रोक लगा दी थी। इस प्रथा को मानने वालों की मान्यता थी कि पति की मौत के बाद पत्नी की इस धरती पर कोई जगह नहीं होती इसलिए उसे भगवान को सौंप देना चाहिए।